दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) के मतदान से पहले राम मंदिर ट्रस्ट का गठन होने की संभावना है. अगले तीन दिनों के भीतर केंद्र सरकार संसद को ट्रस्ट के गठन की जानकारी देगी. सुप्रीम कोर्ट ने नौ फरवरी 2020 तक ट्रस्ट के गठन और मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था. सरकार इस समयसीमा को पूरा करेगी, अधिक समय नहीं मांगा जाएगा.

 

गौरतलब है कि सरकार ने मंगलवार को बताया कि उच्चतम न्यायालय के 9 नवंबर 2019 के निर्णय से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है और इसके निर्देशों के तहत केंद्र सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है. लोकसभा में भोला सिंह, जयंत कुमार राय, विनोद कुमार सोनकर, सुकांत मजूमदार और राजा अमरेश्वर नाईक के प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा, ‘‘वर्ष 2010 की सिविल अपील संख्या 10866-10867 एवं अन्य संबंधित मामलों में उच्चतम न्यायालय द्वारा 9 नवंबर 2019 को दिये गए निर्णय से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है.”
उन्होंने बताया, ‘‘केंद्र सरकार उपरोक्त निर्णय में निहित दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ परामर्श करने सहित सभी आवश्यक कदम उठा रही है.” वहीं, जिलाधिकारी ने अयोध्या नगरी में भगवान राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने के लिए कुछ स्थानीय ग्रामीणों की आपत्ति के बीच भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह योगी आदित्यनाथ सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है जिसकी घोषणा दो साल पहले की गई थी.

अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने फैजाबाद सदर तहसील के हवेली अवध परगना के अंतर्गत आने वाले गांव मांझा बरहटा में भूमि अधिग्रहण के लिए शनिवार को अधिसूचना जारी की. अधिगृहीत की जाने वाली 85 एकड़ भूमि मंदिर नगरी अयोध्या से पांच किलोमीटर दूर है.
इस बीच, गांव के कुछ लोगों ने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आपत्ति उठानी शुरू कर दी है क्योंकि वे उस जमीन को नहीं छोड़ना चाहते जहां वे चार पीढ़ियों से रह रहे हैं. जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘हमने आपत्तियां आमंत्रित की हैं, ताकि मालिक 15 दिन के भीतर इन्हें जमा कर सकें. अनधिकृत रूप से काबिज लोगों को भूमि खाली करनी होगी.” आदित्यनाथ सरकार ने 2017 में इस परियोजना की घोषणा की थी.

(With inputs from ndtv)